मृत चमगादड़ओं को सीधे खुले हाथों से बिल्कुल ना छुये- प्रोफेसर आनंद स्वरूप


कानपुर। चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय कानपुर के कीट विज्ञान विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ आनंद स्वरूप श्रीवास्तव ने बताया कि जब से कोरोनावायरस ने पूरे विश्व को अपने प्रभाव से ग्रसित किया है, सब जगह कोरोना महामारी के प्रकोप में चमगादड़ की भूमिका पर गहराई से संदेह किया जा रहा है ये तो शोध का विषय है और विश्व के तमाम देशों में कोरोना महामारी में चमगादड़ की भूमिका पर कार्य भी हो रहे हैं। डॉ आनंद स्वरूप ने बताया प्रदेश में एवं कई क्षेत्रों में अचानक बहुतायत संख्या में चमगादड़ के मरने तथा उन वृक्षों जिनको यह अपना आसरा बनाते हैं उसके नीचे एक साथ मृत पाए जाने की सूचनाएं टीवी चैनलों एवं अखबारों में आ रही हैं उनके मरने का कारण कोई भी हो लेकिन ग्राम वासियों सहित जनमानस को सलाह है कि मृत चमगादड़ओं को सीधे खुले हाथों से बिल्कुल ना छुएं। डॉ० आनंद स्वरूप ने बताया कि यदि किसी जगह अचानक अधिक संख्या में चमगादड़ मृत पाए जाएं। तो जिला प्रशासन/ वन विभाग के अधिकारियों को तुरंत अवगत कराएं। उन्होंने कहा कि गोरखपुर में आम के बगीचों में मृत पाए गए चमगादड़ओं को बरेली के वेटरनरी रिसर्च इंस्टिट्यूट (आईवीआरआई) में उनकी मृत्यु का कारण जानने के लिए भेजा गया है रिपोर्ट प्राप्त होने पर ही स्थिति स्पष्ट हो पाएगी की कोरोना का इस घटना से कोई संबंध है कि नहीं।  डॉक्टर स्वरूप ने बताया की समय-समय पर मनुष्यों में वायरस जनित बीमारियों में वायरस के मनुष्यो में प्रसार में चमगादड़ की संवाहक की भूमिका पर संदेह किया जाता रहा है। क्योंकि जीव जंतुओं के वैज्ञानिक वर्गीकरण में मनुष्य और चमगादड़ एक ही क्लास (मैंमेलिया)के अंतर्गत आते हैं यह वर्गीकरण जन्तुओ की उनकी प्रकृति, शरीर के बाहरी व आंतरिक संरचनात्मक गुणों पर आधारित है।इसलिए वायरस के प्रसार में चमगादड़ की भूमिका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है।इनकी मृत्यु का कारण  कोरोना वायरस के अतिरिक्त वातावरण में गर्मी का प्रकोप, अत्यधिक तापमान, पानी की अनुपलब्धता, जहरीला पदार्थ खा लेने आदि से होता है परंतु इन कारणों में अधिक तापमान के अतिरिक्त कोई कारण अधिक प्रभावी नहीं प्रतीत होता है।क्योंकि यह समस्त कारण अन्य जाति,प्रजातियों को भी नुकसान पहुँचना चाहिए था लेकिन क्योंकि अन्य कोई जीव जंतु के एक साथ मरने की सूचनाएं नहीं हुई है, इसलिए चिंता किया जाना स्वाभविक है। वैसे तो भारतवर्ष में  चमगादड़ की कई प्रजातियां पाई जाती हैं जिनमे इंडियन फ्लाइंग फॉक्स  भारतीय सब कांटिनेंट में बहुतायत में पाया जाता है और बाग बगीचों के पके फल आम केला आदि को भोजन के रूप में पसंद करता है यह रोगों के प्रसार में इसको हमेशा संदेह से देखा जाता है। चीन से लेकर पूरे विश्व में करोना के प्रसार में चमगादड़ओं की भूमिका पर संदेह हो ऐसी स्थिति में सावधानी पूर्वक मृत चमगादड़ओं की सूचना वन विभाग अथवा प्रशासन को देना चाहिए विश्वविद्यालय के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ आनंद स्वरूप ने बताया कि मृत चमगादड़ का यदि स्वयं निस्तारण करना पड़े तो सावधानीपूर्वक उनको प्लास्टिक की बोरी अथवा बैग में एकत्र कर सैनिटाइजर का छिड़काव करके जमीन में गहरा गड्ढा खोदकर गाड़ देने से बचाव किया जा सकता है उन्होंने बताया कि कार्य करने वाला व्यक्ति मास्क व दस्ताने का अवश्य प्रयोग करें ।उन्होंने यह भी स्पष्ट किया है कि पूर्ण रूप से यह नहीं मान लेना चाहिए कि चमगादड़ ओं की मृत्यु में करोना का ही हाथ है कोरोना की भूमिका की संभावना बहुत कम अथवा  नगण्य है परंतु  सावधानी आवश्यक है इसलिए पूरी सतर्कता के साथ मृत चमगादड़ो का निस्तारण किया जाना चाहिए।


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