लखनऊ, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने उत्तर प्रदेश के कानपुर स्थित एक , आयोग ने कानपुर में सरकार द्वारा संचालित बालिका संरक्षण गृह की इस घटना का स्वत: संज्ञान लिया है। आयोग का मानना है कि इस सिलसिले में आई मीडिया रिपोर्ट अगर सही हैं तो इससे साबित होता है कि लोकसेवक लोग पीड़ित लड़कियों को सुरक्षा मुहैया कराने में नाकाम रहे हैं। बयान में कहा गया है कि सरकारी हिफाजत में रहने के बावजूद वे न तो उन लड़कियों के जीवन के अधिकार की रक्षा कर पाए और न ही उनकी स्वतंत्रता और गरिमा की सुरक्षा।
आयोग ने प्रदेश के मुख्य सचिव को भेजे गये नोटिस में उनसे इस प्रकरण की विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। आयोग ने सरकार से अपेक्षा की है कि वह इस मामले की किसी स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराएगी। साथ ही वह पूरे प्रदेश के संरक्षण गृहों में रहने वाली महिलाओं और लड़कियों के स्वास्थ्य की समीक्षा भी कराएगी। आयोग ने राज्य के पुलिस महानिदेशक को भी नोटिस जारी करके उनसे इस मामले में दर्ज मुकदमे और जांच की स्थिति से संबंधित रिपोर्ट मांगी है। मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक से चार हफ्तों में जवाब देने की अपेक्षा की गई है।
जिलाधिकारी ब्रह्मदेव राम तिवारी ने इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि गर्भवती पाई गई पांच लड़कियां कोविड-19 संक्रमित भी पाई गई हैं। इन लड़कियों को आगरा, एटा, कन्नौज, फिरोजाबाद और कानपुर की बाल कल्याण समितियों द्वारा कानपुर रेफर किया गया था। उन्होंने बताया कि गर्भवती दो अन्य लड़कियां कोविड-19 संक्रमित नहीं पाई गई हैं।
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