शासन ने जिला प्रोबेशन अधिकारी और शेल्टर होम अधिक्षिका को​ किया सस्पेंड।


कानपुर। राजकीय बाल गृह (बालिका) के मामले में यूपी सरकार ने बड़ी कार्रवाई की है. महिला कल्याण राज्यमंत्री ने जहां किसी प्रकार की कोताही न होने की बात कही थी, वहीं इस बयान के कुछ देर बाद ही योगी सरकार ने कानपुर के जिला प्रोबेशन अधिकारी  और शेल्टर होम अधीक्षिका को सस्पेंड कर दिया.

कानपुर में राजकीय बाल गृह (बालिका) का प्रकरण जिस तरह से गर्माया, उसके बाद विपक्ष हमलावर की भूमिका में आ गया. सोशल मीडिया में भी यह प्रकरण टॉप ट्रेंड किया. हालांकि, कमिश्नर और डीएम ने इस मामले में पूरी स्थिति को स्पष्ट किया. इस बीच राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की सदस्य डॉ. शुचिता चतुर्वेदी ने यहां आकर स्थिति का जायजा लिया. डॉ. शुचिता चतुर्वेदी ने यहां मिले पहले मामले के बाद सभी बालिकाओं को समय से क्वारंटाइन न करने को लेकर चूक मानी थी. इसके बाद उन्होंने शासन को अपनी रिपोर्ट सौंपी थी।

जिला प्रोबेशन अधिकारी पर यह आरोप शासन ने जिला प्रोबेशन अधिकारी अजीत कुमार को निलंबित कर दिया है. अजीत कुमार पर आरोप हैं कि वह अपने ड्यूटी के निर्वहन में फेल रहे और सोशल मीडिया पर शेल्टर होम को लेकर खबरें आनी शुरू हुईं तो उन्होंने उसका खंडन करना उचित नहीं समझा इस कारण उन पर कार्यवाही हुई इसके अलावा अधिक्षिका को भी तथ्यों के छुपाने का दोषी माना गया और निलंबित कर दिया गया।

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