कानपुर। मंगलवार आषाढ़ सुदी द्बितीय को श्री जगन्नाथ स्वामी बहन सुभ्रद्र भ्राता बलभ्रद जी का अभिषेक पूजन कर के रजत जाडित सिहासन मे विराजमान करा कर पूजन किया गया। जगन्नाथ गली प्राचीन मंदिर श्री जगन्नाथ जी स्वामी मन्दिर भाई जी में प्रातः 6:00 बजे मंगला आरती की गई। मंगला आरती के पश्चात भगवान को भोग अर्पित कर पनकी मंदिर के बडे महान्त श्री कृष्णदास एवं महामंडलेश्वर जितेंद्र ने भोग अर्पित किया। भोग में भीगे हुई चने की दाल मूग की दाल जामुन आम बड़हल मिठाई व मलाई का लगाया गया जगन्नाथ स्वामी जी के जयकारों से भोग आरती संपन्न हुई। पूजन के वक्त कोरोना महामारी संक्रमण के कारण सोशल डिस्टेंसिंग का पूरा पालन किया गया मन्दिर मे सिर्फ 5लोगों को ही पूजन की अनुमति मन्दिर कमेटियों और प्रशासन के बीच तय अनुसार किया गया इस साल 210 वर्ष पुरानी प्रचीन श्री जगन्नाथ जी की रथ यात्रा नहीं निकली। जगन्नाथ के बारे में की मानता है कि भाई-बहन के प्रेम का प्रतीक है भगवान जगन्नाथ स्वामी जी की रथयात्रा द्वारका में सुभ्रद्र जी ने एक बार नगर देखने की इच्छा प्रकट की श्री कृष्ण और बलराम जी प्रथक प्रथक रथो मे बैठकर और अपने रथो के मध्य मे अपनी बहन सुभ्रद्र जी का रथ रखकर नगर दर्शन के लिए निकले।इस स्मृति के प्रतीक स्वरुप प्रतिवर्ष आषाढ़ सुदी द्बितीय भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा निकालने की परंपरा है। कानपुर धनी आबादी के मध्य जगन्नाथ जी की गली जनरलगंज स्थित है तीन प्रचीन मंदिर से जगन्नाथ जी प्रतिवर्ष रथयात्रा का अयोजन होता आ रहा हैं। 210 साल पुरानी परंपरा इस वर्ष कोरोना के कारण परम्परा टूटीं। सन 1947 में देश बंटवारे के समय भी जगन्नाथ स्वामी की रथ यात्रा निकाली गई थी कानपुर के इतिहास में पहली बार हुआ है कि जगन्नाथ स्वामी की रथयात्रा नहीं निकली। श्री जगन्नाथ जी मंदिर उमा जगदीश में मंदिर के अध्यक्ष रज्जन लाल और महामंत्री सुरेश ओमर संत गोपाल गु्प्ता मंदिर के पुजारी ने अभिषेक पूजन संपन्न कराया इसी प्रकार बिरजी भगत मन्दिर में भी जगन्नाथ जी का विधि विधान से प्राचीन परंपराओं के अनुसार पूजन हुआ। पूजन मे पंनकी मन्दिर के बडे महांन्त कृष्ण दास महामंडलेश्वर जितेन्द्र दास ज्ञानेन्द्र विश्नोई, मोहन लाल,श्याम महेश्वरी,अभिनव अग्रवाल, राम शंकर गुप्ता, अभिषेक गुप्ता, अम्बरीष गुप्ता, शंशाक सिह आदि।
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