- गुप्तकालीन प्राचीन मन्दिर का इतिहास :
यह प्राचीन मन्दिर 5वीं सदी का बना हुआ है यह भारत का बहुत पुराना प्राचीन मन्दिर पक्की ईंटो का बना हुआ है। इस प्राचीन मन्दिर का मुख पूर्व की ओर है इस प्राचीन मन्दिर को हिन्दू पवित्र स्थान माना जाता है। गुप्तकालीन मन्दिर की 70 फीट ऊंचाई, 25 फीट चौड़ाई,18 इंच लम्बी, 9 इंच चौड़ी और 3 इंच चौड़ी मोटी ईंटो से बना है मन्दिर की दीवारो की मोटाई लगभग 9 फिट है। इसमें गुम्दाकार मेहराब है जिसका उपयोग भारत में पहली बार किया गया है। इस प्राचीन मन्दिर में 15 फीट लम्बा और 15 फीट चौड़ा दो मंजिला गर्भग्रह है। इस प्राचीन मन्दिर की इमारत बाहर से देखने में एक खूबसूरत मन्दिर जैसा प्रतीत होता है लेकिन मन्दिर के अंदर क्या है किसी को कोई जानकारी नहीं है। इस गांव की चार पीढ़ियों से मन्दिर के अंदर देखा तक नहीं है जानकारी के मुताबिक गुप्तकालीन मन्दिर में रहस्यमयी मौतों के कारण इस प्राचीन मन्दिर का दरवाजा बन्द कर दिया गया था तब से आज तक खुला नहीं है यह मन्दिर पुरातत्व विभाग के अधीन कर दिया गया है इस मन्दिर के मेन गेट में पुरातत्व विभाग का ताला लगा हुआ है। जिससे मन्दिर के अंदर प्रवेश करने की अनुमति नही है मन्दिर के बाहर जाने वाले पर्यटक घूम सकते है।
- मन्दिर की रहस्यमयी घटना :
भीतरगांव निवासी हरिराम सिंह 85 वर्षीय ने बताया कि गुप्तकालीन प्राचीन मन्दिर ग्रह वस्तु का अनुपम उदारहण माना जाता है और मन्दिर की मूर्तिया पक्की मिट्टी से बनी हुयी थी करीब तीन सौ वर्ष पहले रात में कबीलायी समुदाय के लोग इसी रास्ते होकर जा रहे थे तभी अचानक तेज तूफान और भीषण बारिश होने लगी।कबीलायी समुदाय के लोग बारिश से बचने के लिये मन्दिर में आकर छिप गये थे तभी अचानक मन्दिर की छत पर अकाशीय बिजली गिर गयी। अकाशीय बिजली गिरने से मन्दिर का ऊपरी भाग नष्ट हो गया और उसी में कबीलायी समुदाय के लोग भी हादसे का शिकार हो गये सभी कबीलायी समुदाय के लोगो की मौत हो गयी। तब से यह मन्दिर एक रहस्य बना हुआ है आज तक कोई व्यक्ति रात के समय मन्दिर में अकेले नहीं जाता है।
- पुरातत्व विभाग के अधिकारियो के मुताबिक :
पुरातत्व विभाग के कर्मचारी के मुताबिक इस प्राचीन मन्दिर में जांच के दौरान कुछ तत्व पाये गये है इसमें पक्की ईंटे लगी है जिससे अनुमान लगाया गया है कि यह मन्दिर राजा चन्द्रगुप्त मौर्य के शासन काल का है इस मन्दिर का ताला तभी खुलता है जब पुरातत्व विभाग लखनऊ से आदेश आता है। मोहन सिंह कर्मचारी पुरातत्व विभाग ने बताया कि इस प्राचीन मन्दिर में जो ईंटे लगी है अब यह ईंटे मिलना बहुत मुश्किल है मन्दिर की ईंटे देखने में अत्यधिक खूबसूरत है बारिश और तूफान आने की वजह से मन्दिर में लगी मुर्तियां और ईंटे
खराब हो गयी है भारत का यह प्राचीन मन्दिर अपना अस्तित्व खो रहा था। इसलिये पुरातत्व विभाग ने इस प्राचीन मंदिर की मरम्मत करायी है। इस मन्दिर में 11 गर्भ ग्रह और कई आले बने हुये है। मन्दिर को चारो तरफ से दोहरी दीवारो से जोड़ दिया गया है। यहां के मृणमूर्ति कला के कुछ उदारहण में भगवान विष्णु का वराह अवतार, चार हाथो वाली मां दुर्गा और चार हाथो वाले भगवान गणेश का अंकन प्रमुख है। भारत का यह प्राचीन मन्दिर गुप्तकालीन को दर्शाता है इस प्राचीन मन्दिर को सम्पूर्ण भारत और विश्व के कई देशो के पर्यटक देखने के लिए आते है। यह खूबसूरत प्राचीन गुप्तकालीन मन्दिर अपनी अद्भुत कला को बिखेरता है।
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