वसूलीबाज यूट्यूबर्स, फेसबुकिया, व्हाट्सएप पत्रकारों की अब खैर नहीं

Nineone times


उत्तर प्रदेश के कानपुर में इन दिनों पत्रकार पुलिस के निशाने पर हैं. दरअसल, कानपुर के अलग-अलग थानों में कुछ पत्रकारों के खिलाफ जमीनों पर कब्जा और वसूली करने समेत कई धाराओं में मामले दर्ज हुए हैं.

इस पूरे मामले की शुरुआत शहर के पॉश एरिया सिविल लाइंस की जमीन पर कब्जा करने को लेकर हुई. यहां कानपुर प्रेस क्लब के पूर्व अध्यक्ष और टीवी चैनल, भारत समाचार के पत्रकार अवनीश दीक्षित पर करीब एक हजार करोड़ रुपये कीमत की जमीन पर अपने साथियों के संग कब्जा करने का आरोप लगा. इसके बाद शहर में ‘वसूलीबाज’ पत्रकारों और यूट्यूबर्स की धर-पकड़ शुरू हो गई. 

पुलिस आयुक्त अखिल कुमार ने कहा कि जनमानस में खौफ पैदा करने वाले वसूलीबाज यूट्यूबर्स, फेसबुकिया, व्हाट्सएप पत्रकारों की अब खैर नहीं है. उन्होंने ऐसे तथाकथित वसूलीबाज पत्रकारों की शिकायत दर्ज कराने की अपील भी आम जनता से की है. यही नहीं इसके लिए पुलिस ने बकायदा नंबर जारी किए कि आप इन नंबरो पर शिकायत कर सकते हैं. इसका असर यह हुआ कि कानपुर के अलग-अलग थानों में ऐसे आरोपियों के खिलाफ दर्जनभर एफआईआर दर्ज हो गईं. एफआईआर दर्ज होने का सिलसिला अभी भी जारी है.

लेकिन मामला यहीं नहीं रुका अब इन आरोपियों समेत कई पत्रकारों के खिलाफ पुराने मामले में भी शिकायत दी जा रही है और पुलिस भी तुरंत ही सक्रिय होकर एफआईआर दर्ज कर रही है. 

आइए पत्रकारों के खिलाफ इस अभियान की वजह बने कानपुर के पत्रकार अवनीश दीक्षित और ये जमीन कब्जे का मामला समझते हैं. इस मामले में पुलिस ने बीते 28 जुलाई को ही दो एफआईआर दर्ज कर लीं.

पहली एफआईआर 

28 जुलाई को एक एफआईआर थाना- कोतवाली में दर्ज की गई. यह एफआईआर विपिन कुमार की शिकायत पर दर्ज हुई है. विपिन पेशे से कानपुर तहसील में लेखपाल हैं. 

विपिन की शिकायत के मुताबिक, नजूल भूखंडों (ब्लॉक-15, भूखंड संख्या-69, 69ए 69 बी) पर 28 जुलाई को हरेंद्र मसीह, राहुल वर्मा, मौरिस एरियल, कमला एरियल, अभिषेक एरियल व अर्पण एरियल के उकसाने पर अवनीश दीक्षित, जीतेश झां, मोहित बाजपेयी, संदीप, विक्की चार्ल्स, अब्बास, जितेंद्र समेत करीब 20 अज्ञात व्यक्ति कब्जा करने पहुंचे. इन्होंने बलपूर्वक अनाधिकृत कब्जा करने की कोशिश की. जबकि नजूल अभिलेखकों में भूखंड संख्या- 69ए दिनांक 1 अक्टूबर 1890 से पट्टे पर 96 वर्ष 6 माह और 1 जनवरी 1884 से पट्टे पर मियाद 99 वर्ष दर्ज अभिलेख है. इस प्रकार दोनों भूखंडों की पट्टाअवधि समाप्त हो जाने के कारण वर्तमान में नजूल संपत्ति है.

इसके बाद पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (2023) के तहत 329 (4), सार्वजनिक संपत्ति नुकसान निवारण अधिनियम (1984) की धारा 3 व 5 के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया. 

मामले के बारे में पूछे जाने पर विपिन कहते हैं, "हमने एफआईआर दर्ज कराई है लेकिन आप इस बारे में तहसीलदार से बात कीजिए. हमें इस बारे में कुछ भी बात करने के लिए मना किया गया है." 

लखन यादव कहते हैं कि इस पूरे घटनाक्रम में भारत समाचार के पत्रकार अवनीश दीक्षित अगुवाई कर रहे थे. 

हरेंद्र मसीह कौन? 

हरेंद्र मसीह के बारे में पूछे जाने पर लखन यादव कहते हैं, “झांसी निवासी हरेंद्र मसीह नाम के एक व्यक्ति ने इस जमीन को षडयंत्र के तहत एक फर्म दर्शाकर अपने नाम करने की कोशिश की थी. इसके बाद उसने अवनीश को पावर ऑफ अटॉर्नी दी. मसीह अभी फरार है, गिरफ्तारी की कोशिश जारी है.” 

तो क्या इस जमीन पर पहले से हरेंद्र मसीह का कब्जा था? इस सवाल के जवाब में लखन यादव कहते हैं, “नहीं, यह सब खेल कागजों पर चल रहा था. हरेंद्र मसीह इसी तरह की जमीनों पर ऐसा काम करते हैं. आरोपियो में पत्रकार कम यूट्यूबर ज्यादा हैं. अभी तक सिर्फ दो गिरफ्तारियां हुई हैं. बाकी लोग फरार हैं. जिस दिन अवनीश दीक्षित को गिरफ्तार किया गया था, उस दिन पुलिस टीम का एक बड़ा जत्था शामिल था. जिनमें 11 थानों की पुलिस और 3 एसीपी शामिल थे.” 

क्या अवनीश इतने पावरफुल हैं कि उन्हें इतनी भारी तादात में पुलिस के लोग पकड़ने पहुंचे? इस पर वे कहते हैं कि पावरफुल तो नहीं कहेंगे लेकिन बेहतर मैनेजमेंट के लिए ऐसा किया गया. कई बार सुरक्षा के लिए ऐसा किया जाता है. बिकरू कांड से सबक लेना चाहिए.

वे आगे जोड़ते हैं कि अवनीश पर पहले भी कई एफआईआर दर्ज हैं. उनका पुराना आपराधिक रिकॉर्ड रहा है.


हो रही है.   

वह कहते हैं कि कुछ ऐसे भी लोग हैं, जो कि बहती गंगा में हाथ धो रहे हैं. लेकिन ऐसे मामलों में पुलिस जांच कर रही है. अभी तक तीन पत्रकार गिरफ्तार किए गए हैं. इनमें भारत समाचार के अवनीश दीक्षित, के न्यूज़ के रिपोर्टर शुभम मिश्रा और शाश्वत टाइम्स के रिपोर्टर नितिन सिंह शामिल हैं. बाकी गिरफ्तारियों के लिए पुलिस छापेमारी कर रही है.

बता दें कि फिलहाल पुलिस अवनीश दीक्षित और उसके साथियों के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट की कार्रवाई करने की तैयारी कर रही है. पुलिस ने अब तक इन अपराधों में शामिल 36 लोगों को चिन्हित किया है. अकेले अवनीश पर सब नए पुराने मिलाकर 14 मामले दर्ज हो चुके हैं. पुराने मामलों में भी पुलिस ने नए सिरे से जांच शुरू कर दी है. 

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